Monday, August 9, 2010

सायेद मे सायेर बनू बस आपके लिए

इतनी प्यासे हे हंम की,
सारे दरिया की पानी पि लूँ ,
मगर एक नजर आप की,
मिटा देती हे साड़ी प्यास |

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लोक कहेते हे हामे पागल ,
 सायेद हां एक पागल हे,
मगर वो पागल पण वस आप के लिए.|
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चाँद ने पूछा हामे ,
तुम किउन इतना उदास हो,
हामने चाँद से कहा,
किउन की मेरी  जान जो,
हांम से दूर हे |

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कहेने के लिए हे बहोत कुछ,
मगर तुम हो की सुनती नेही ,
लिख ने के लिए हे बहोत कुछ,
मगर कलम मे साही नेही |
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